Yeh Kaisa nasha hai

तेरे इश्क़ के नशे का यह कैसा सरूर है , ना रातो को नींद ना दिन की खबर है, चाँद तारे भी थक के छुप गए है ,पर यह रूह अबतक क्यों बेकरार है

आ जा के अब दिल बेचैन है , तुझे नज़र भर देख लू तो ही मिलता मुझे करार है

Yeah durria

दूर उनसे रहा भी ना जाये, पास आने से क्यों यह दिल घबराएं, यह कैसा इश्क़ है कोई तो समझाए, उनकी मोहब्बत है या नशा कोई तो बताए ,डर है कही हम उनकी यादों में कही मर ही ना जाये

जिस रात की सुबह ना हो वो रात तेरे संग बितानी है ,सीने पर सर रखके तुम्हारे कितनी ही दास्ताँ सुनानी है,कुछ तुमको जानना है कुछ अपनी कमियाँ तुम्हे बतानी है,ए मेरे सनम यह रूह तो कब से हो गयी है तुम्हारी अब आरजू तुम्हारी बाहों में समा जाने की है

नजदीक ना आओ के जल जाएंगे हम, दूर ना जाओ की बुझ जाएंगे हम, जलने दो इस आग को यूही दिलो के दरम्यान , हम तुम सुलगते रहे रात भर यूही, सुबह दो नही एक नज़र आएंगे हम

लहूलुहान है यह रूह आज जो ये जिस्म बेपर्दा है, किससे करे कबूल गुनाह अपना हम तो आईने से भी शर्मिंदा है

जो बीत गयी वो रात थी, जो खत्म हुई वो बात थी, किसने देखा क्या क्या टूटा ,जो समेटे है वो कांच नही दिल के टुकड़े है , वफ़ा के बदले बेवफाई क्या यही उनकी चाहत थी

जब से हुई है तुमसे मोहब्बत, यह रूह तुम्हारी ख़ुशबू से महकने लगी है, दुनियां ने जब भी इत्र का नाम पूछा, ना जाने क्यू शर्म से नज़रे झुकने लगी है

मेरा हर रास्ता क्यों उन्ही की राहो से जा मिलता है, जितना रहती हूं दूर उनसे उतना ही दिल उन्हें याद करता है, हमे तो यह आदत लगती है उनकी ,पर दुनियां को ये प्यार लगता है

हर खवाइश पूरी हो यह ज़रूरी तो नही, यह सोच हमने उन्हें अपना बनाने को ख्वाइश नही मकसद बना लिया है

हर कोशिश नाकाम हुई उन्हें अपना बनाने की, कमी हममे थी या उनकी ख्वाइशें बडी थी, हम झुकते गए उनकी मोहब्बत में औऱ आज टुकड़ो में बिखरे से है, वो कमजोर बता आगे बड़ गए हम वही रुके से है