ना मौसम रुका ना नदियों का पानी रुका, अगर वो ना ठहरे एक जगह तो उनकी ख़ता क्या बदल गए हैं ऐसा दोष उन्हें क्यों दे ,हम ही कुदरत का नियम ना समझे इसमें उस रब की गलती क्या

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