वो एक बार पुकारे ये सोच के कदम उठाया हमने, उस एक आवाज़ की उम्मीद में कितनी दूर निकल आये उनसे, अब क्या रिश्ता कहेंगे उनसे मिलेंगे वो अगर, सांसो के जैसे बसते थे इस जिस्म मे जो रूह बनकर

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