हर कोशिश नाकाम हुई उन्हें अपना बनाने की, कमी हममे थी या उनकी ख्वाइशें बडी थी, हम झुकते गए उनकी मोहब्बत में औऱ आज टुकड़ो में बिखरे से है, वो कमजोर बता आगे बड़ गए हम वही रुके से है

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