जो बीत गयी वो रात थी, जो खत्म हुई वो बात थी, किसने देखा क्या क्या टूटा ,जो समेटे है वो कांच नही दिल के टुकड़े है , वफ़ा के बदले बेवफाई क्या यही उनकी चाहत थी

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