जिस रात की सुबह ना हो वो रात तेरे संग बितानी है ,सीने पर सर रखके तुम्हारे कितनी ही दास्ताँ सुनानी है,कुछ तुमको जानना है कुछ अपनी कमियाँ तुम्हे बतानी है,ए मेरे सनम यह रूह तो कब से हो गयी है तुम्हारी अब आरजू तुम्हारी बाहों में समा जाने की है

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