बदलो चाहे लाख चेहरे हमसे कैसे छुपोगे, हवाओं में है ख़ुशबू इस rooh की,साँसों में घुल सीने में उतरने से इसे कैसे रोक पाओगें

Leave a Reply

Your e-mail address will not be published. Required fields are marked *

WordPress spam blocked by CleanTalk.