वो दर्द ही क्या जो दब जाए, वो आँसू ही क्या जो छुपाने से छुप जाए, बस एक आस बाकी है कभी हमे वो आवाज़ दे, दिल तो टूट ही चुका है कही इस आस में सांस छूट ना जाये

मुसाफिर आएंगे चले जाएंगे,हम तो मील के पत्थर है यही खड़े रह जाएंगे, हमसे ही पहचान राह की हमसे ही मंज़िल है, कद्र कोई हमारी भी कर लो, अगर हम न रहे तो सब यूही भटकते रह जाएंगे

क्यों करूँ मैं फिर से मोहब्बत अभी तो तुम मुझमे हो, पानी से पानी पर पानी भी लिख लुंगी अगर तुम मेरे हो

जब भी आप आये हो सामने हम शरमाये है, पर मोहब्बत तो देखिए कितनी है ,कल रात सपने में देखा आपको औऱ नज़रे खुद ब खुद झुक गयी

जितना सोचती हूं दूर जाऊ तुमसे तुम उतना पास खीच लेते हो, मेरी यादो में बसे हो इस कदर मुझे मुझसे ही छीन लेते हो, आना है तो आ जाओ ज़िंदगी में क्यू यूही तड़पा के मुझे बेचैन कर देते हो

जब से देखा है तुम्हे दिल वही ठहर सा गया है, देखो तो जरा तुम्हारे दिल से ही कही जुड़ा है, ना जायेंगे कभी हम दूर तुमसे, यह वादा हमने खुद से कर लिया है

कल रात वोह सपने में आये , ना जाने क्या कानों में गुनगुनाये, हम थोड़ा सिमटे थोड़ा मुस्कुराये, पकड़े रहे हाथ उनका कही वो फिर चले ही ना जाये, खोली नहीं पलके हमने डर से रात भर, ये सच था या सपना किससे पूछे बिस्तर की सलवटों को हम समझ ही ना पाए

तुमसे मोहब्बत है बेपनाह ये उस रब को भी पता है, कुछ औऱ मांगा नही तुमहारे सीवा इन हाथो की लकीरों को भी पता है, यूही रूठ जाते हो हमसे क्यों बार बार, तुम बिन जी नही सकते क्या ये तुम्हे नही पता है

कभी सोचा नही जिन्हें वो आज इतने करीब कैसे हो गए, जिनसे सिर्फ पहचान थी वो इतने अपने कैसे हो गए, जिन्हें कभी सोचा नही आज मेरे हर खवाब के मालिक हो गए, कोई तो ले आके खबर हम दिल के हाथो इतने मजबूर कैसे हो गए

ना जाने क्यू तुम्हे सोचती हूं हर वक़्त, सामने ही हो फिर भी क्यू निगाहे ढूँढती है हर वक़्त, आ जाओ पास बैठो थोड़ा छू के देखू तुम्हे, है गुज़ारिश बस यूही रहना दिल मे बनकर धड़कन हर वक़्त