Yeh Kaisa nasha hai

तेरे इश्क़ के नशे का यह कैसा सरूर है , ना रातो को नींद ना दिन की खबर है, चाँद तारे भी थक के छुप गए है ,पर यह रूह अबतक क्यों बेकरार है

आ जा के अब दिल बेचैन है , तुझे नज़र भर देख लू तो ही मिलता मुझे करार है

Yeah durria

दूर उनसे रहा भी ना जाये, पास आने से क्यों यह दिल घबराएं, यह कैसा इश्क़ है कोई तो समझाए, उनकी मोहब्बत है या नशा कोई तो बताए ,डर है कही हम उनकी यादों में कही मर ही ना जाये

जिस रात की सुबह ना हो वो रात तेरे संग बितानी है ,सीने पर सर रखके तुम्हारे कितनी ही दास्ताँ सुनानी है,कुछ तुमको जानना है कुछ अपनी कमियाँ तुम्हे बतानी है,ए मेरे सनम यह रूह तो कब से हो गयी है तुम्हारी अब आरजू तुम्हारी बाहों में समा जाने की है