राते बदली बदली सी है खवाब बदले से,
तुम्हारे जब से हुए है दिखते हम ही बदले बदले से,
महक बदली सी है इन फिज़ाओं में नज़ारे बदले से,
ये तेरी चाहत का असर है या कुछ औऱ
हमें तो तस्वीरों में दिखते है रब भी बदले बदले से

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