कोई अपना ना हुआ

इस भरी दुनिया में कोई अपना ना हुआ, जिसे कहते हमसफर ऐसा कोई साथी ना हुआ, मिलते तो बहुत है रोज इन राहो मे, जो मंज़िल तक ले जाये ऐसा सहारा ना मिला

जिंदगी में मोहब्बत तो सब किया करते है, इस रूह की मोहब्बत तुझे मिट के भी महसूस होगी, एक एक सांस मेरी नाम तेरे लिखी है मैंने, फना होके भी सकूँ दे यह वादा निभाएगी मिट्टी मेरी

Izhare mohabbat

कल रात वो क्या कह गए हमसे पाँव ज़मीं पर नही ,वो उनकी मोहब्बत थी या असर महखाने का, किया तो इज़हारे मोहब्बत था पर जैसे झोली में डाल गए चाँद फलक का

Badle badle se haalat hai, badle se ab Woh bhi, kal tak sans thei sine mei jinki aaj unke hum Kuch bhi nahi

तुम मेरी चाहत मेरी हसरत हो तुम, तुम्ही रास्ते और मेरी मंज़िल भी तुम, तुमको चाहा बस तुम्ही को पाना है, इन सांसो की रफ्तार और दिल की धड़कन हो तुम

बदलो चाहे लाख चेहरे हमसे कैसे छुपोगे, हवाओं में है ख़ुशबू इस rooh की,साँसों में घुल सीने में उतरने से इसे कैसे रोक पाओगें

तेरे इश्क़ ने किया यह असर

तेरे इश्क़ में यह रूह पिघल सी जाती है, जब भी सुनती है तेरी आवाज़ सब भूल सी जाती है, ना जमाने की परवाह ना उस रब का खौफ , तुझे देख बस तेरे पीछे खिंची चली आती है

Mere humsafar

सुबह कोयल की धुन बनकर मेरे कानों में तुम्हारी आवाज़ गूँजी थी, तुमने आकर जो धीरे से खवाबो से जगाया था, खवाब समझ कर पलके मूंदे पड़ी रही पर चेहरा शायद मंद मंद मुस्काया था,

हो गए सब ख्वाब पूरे जब खोली पलके तुम्हे सामने पाया था

नजदीक ना आओ के जल जाएंगे हम, दूर ना जाओ की बुझ जाएंगे हम, जलने दो इस आग को यूही दिलो के दरम्यान , हम तुम सुलगते रहे रात भर यूही, सुबह दो नही एक नज़र आएंगे हम

लहूलुहान है यह रूह आज जो ये जिस्म बेपर्दा है, किससे करे कबूल गुनाह अपना हम तो आईने से भी शर्मिंदा है