तुम मेरी चाहत मेरी हसरत हो तुम, तुम्ही रास्ते और मेरी मंज़िल भी तुम, तुमको चाहा बस तुम्ही को पाना है, इन सांसो की रफ्तार और दिल की धड़कन हो तुम

बदलो चाहे लाख चेहरे हमसे कैसे छुपोगे, हवाओं में है ख़ुशबू इस rooh की,साँसों में घुल सीने में उतरने से इसे कैसे रोक पाओगें

तेरे इश्क़ ने किया यह असर

तेरे इश्क़ में यह रूह पिघल सी जाती है, जब भी सुनती है तेरी आवाज़ सब भूल सी जाती है, ना जमाने की परवाह ना उस रब का खौफ , तुझे देख बस तेरे पीछे खिंची चली आती है

Mere humsafar

सुबह कोयल की धुन बनकर मेरे कानों में तुम्हारी आवाज़ गूँजी थी, तुमने आकर जो धीरे से खवाबो से जगाया था, खवाब समझ कर पलके मूंदे पड़ी रही पर चेहरा शायद मंद मंद मुस्काया था,

हो गए सब ख्वाब पूरे जब खोली पलके तुम्हे सामने पाया था

नजदीक ना आओ के जल जाएंगे हम, दूर ना जाओ की बुझ जाएंगे हम, जलने दो इस आग को यूही दिलो के दरम्यान , हम तुम सुलगते रहे रात भर यूही, सुबह दो नही एक नज़र आएंगे हम

लहूलुहान है यह रूह आज जो ये जिस्म बेपर्दा है, किससे करे कबूल गुनाह अपना हम तो आईने से भी शर्मिंदा है

जो बीत गयी वो रात थी, जो खत्म हुई वो बात थी, किसने देखा क्या क्या टूटा ,जो समेटे है वो कांच नही दिल के टुकड़े है , वफ़ा के बदले बेवफाई क्या यही उनकी चाहत थी

जब से हुई है तुमसे मोहब्बत, यह रूह तुम्हारी ख़ुशबू से महकने लगी है, दुनियां ने जब भी इत्र का नाम पूछा, ना जाने क्यू शर्म से नज़रे झुकने लगी है

मेरा हर रास्ता क्यों उन्ही की राहो से जा मिलता है, जितना रहती हूं दूर उनसे उतना ही दिल उन्हें याद करता है, हमे तो यह आदत लगती है उनकी ,पर दुनियां को ये प्यार लगता है

हर खवाइश पूरी हो यह ज़रूरी तो नही, यह सोच हमने उन्हें अपना बनाने को ख्वाइश नही मकसद बना लिया है