Izhare mohabbat

कल रात वो क्या कह गए हमसे पाँव ज़मीं पर नही ,वो उनकी मोहब्बत थी या असर महखाने का, किया तो इज़हारे मोहब्बत था पर जैसे झोली में डाल गए चाँद फलक का

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