Mere humsafar

सुबह कोयल की धुन बनकर मेरे कानों में तुम्हारी आवाज़ गूँजी थी, तुमने आकर जो धीरे से खवाबो से जगाया था, खवाब समझ कर पलके मूंदे पड़ी रही पर चेहरा शायद मंद मंद मुस्काया था,

हो गए सब ख्वाब पूरे जब खोली पलके तुम्हे सामने पाया था

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